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मटर की ये 5 उन्नत किस्में दे सकती हैं बंपर पैदावार, किसानों के लिए सुनहरा मौका!

किसान भाइयों आप सभी अच्छे से जानते होंगे कि सर्दियों का मौसम आते ही मटर की मांग बाजार में बढ़ जाती है। चाहे सब्जी हो, पराठा हो या चाट, मटर हर घर की पसंद है। किसानों के लिए मटर की खेती कम समय में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है। लेकिन सही किस्म का चयन करना बहुत जरूरी है ताकि पैदावार ज्यादा हो और मेहनत का पूरा फल मिले। आज हम आपको मटर की 5 सबसे उन्नत किस्मों के बारे में बता रहे हैं जो कम समय में अच्छी पैदावार और रोगों से लड़ने की ताकत रखती हैं।

1. काशी नंदिनी: जल्दी तैयार होने वाली किस्म
काशी नंदिनी मटर की अगेती किस्म है, जो बुआई के 60-65 दिन में फलियां देने लगती है। इसकी फलियों में 7-9 मीठे दाने होते हैं। प्रति एकड़ 38-40 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है। यह बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के लिए खासतौर पर उपयुक्त है।

2. पंत मटर 155: रोगों से लड़ने में माहिर
यह हाइब्रिड किस्म 50-55 दिन में फलियां देना शुरू कर देती है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता शानदार है, खासकर चूर्णी फफूंद और फली छेदक कीटों के खिलाफ। प्रति हेक्टेयर 150 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है। यह उत्तर भारत के किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है।

3. आर्केल: स्वाद और पैदावार का शानदार मेल
आर्केल एक यूरोपियन किस्म है, जिसकी फलियां 8-10 सेमी लंबी होती हैं और हर फली में 5-6 मीठे दाने होते हैं। यह 60-65 दिन में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग खूब रहती है।

4. काशी उदय: लंबी फलियों वाली किस्म
2005 में विकसित काशी उदय की फलियां 9-10 सेमी लंबी होती हैं। यह 60 दिन में तैयार होकर प्रति एकड़ 42 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है। यह बिहार, झारखंड और यूपी के लिए अच्छी है।

5. जीएस-10: ज्यादा दाने, ज्यादा मुनाफा
जीएस-10 की फलियां लंबी और 10 दानों वाली होती हैं। यह किस्म 125 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार दे सकती है। इसके दाने मीठे और बाजार में खूब पसंद किए जाते हैं।

कैसे करें खेती?
मटर की बुआई के लिए सितंबर से अक्टूबर का समय सबसे अच्छा है। खेत में नमी होनी चाहिए और बीजों को 5-7 सेमी गहराई में बोना चाहिए। बीजों को थीरम या मैकोंजेब से उपचारित करें ताकि कीटों का खतरा कम हो। प्रति हेक्टेयर 90-100 किलो बीज काफी है।

मुनाफे का गणित
मटर की खेती से प्रति हेक्टेयर 120-150 क्विंटल हरी फलियां मिल सकती हैं। बाजार में 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 3.5-4.5 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है। लागत निकालने के बाद भी अच्छा मुनाफा मिलता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी ऑनलाइन स्रोतों और कृषि विशेषज्ञों के सुझावों पर आधारित है। सटीक जानकारी और बीजों की उपलब्धता के लिए नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें।

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