भारत के बहुत बड़ा देश है और यहां अलग अलग धर्म और अलग अलग परम्पराओं का पालन करते वाले लोग बसते है। भारत में बहुत सारी अलग अलग परम्पराओं में कई तो ऐसी है जिनके बारे में हम अक्सर सुनते रहते है लेकिन उसका एक्चुअल कारण हमें पता नहीं होता है। इन्ही में से एक परम्परा ये भी है की शाम होते ही झाड़ू नहीं लगाई जाती और ये हमने अपने पुरखों से भी सुनी है। ये कोई नई प्रथा नहीं है बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक परम्परा है जिसको आज के आधुनिक ज़माने में भी कई घरों में निभाया जा रहा है। आइये आज आपको इसके पीछे का एक्चुअल कारण बताते है।
क्या ये अंधविश्वास है या सांस्कृतिक कारण
सबसे पहल इसके अंधविश्वास या सांस्कृतिक कारण की बात करते है। दोस्तों कई लोग मानते है की शाम के समय में या फिर रात के समय में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए और अगर कोई ऐसा करता है तो उस घर से सकारात्मक ऊर्जा चली जाती है। हिन्दू मान्यताओं में माना जाता है की लक्ष्मी जी जो की धन और वैभव की देवी है घर में शाम को प्रवेश करती है और ऐसे में इस समय अगर आप झाड़ू लगाते है तो आपकी समृद्धि बाहर चली जाती है और लक्ष्मी जो का प्रवेश नहीं होता है। इसके अलावा घर में बुरी आत्माओं का भी प्रवेश हो जाता है।
क्या इसके पीछे वैज्ञानिक नजरिया भी है?
अगर हम इसको वैज्ञानिक नजरिये से देखें तो कुछ तर्क निकलकर हमारे सामने आते है। कहा जाता है की पुराने समय में बिजली नहीं होती थी और ऐसे में कम रौशनी में अगर झाड़ू लगाई जाती थी तो सफाई अच्छे से नहीं होती थी। इसलिए घर में गंदगी राहत जाती थी जिसमे छोटे मोटे कीट कचरे में रह जाते थे। माना जाता है की ये हमारे स्वास्थ के लिए हानिकारक होते थे और इसलिए कम रौशनी में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए। इसके अलावा ये भी कहा जाता है की पुराने समय में झाड़ू को कीमती चीज माना जाता था और इससे दिन में ही सफाई का काम कर लिया जाता था ताकि रात को इसके चोरी होने का खतरा ना रहे। शाम से पहले झाड़ू लगाकर उसको अंदर रख दिया जाता था।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू भी है
दोस्तों शाम को झाड़ू नहीं लगानी चाहिए इसका सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू भी सामने आया है जिसमे कहा जाता है की शाम का समय आमतौर पर परिवार के साथ बिताने, आराम करने या पूजा-पाठ का होता है। ऐसे में झाड़ू लगाने से घर का शांत माहौल खराब हो सकता है। कई लोग मानते हैं कि दिनभर की मेहनत के बाद शाम को घर में सुकून और सकारात्मकता होनी चाहिए न कि सफाई का शोर। आज भी आपको अपने आसपास में कई घर ऐसे मिल जायेंगे जो की शाम होने के बाद में झाड़ू नहीं लगाते है। ग्रामीण इलाकों में तो इसको लगभग सभी घरों में निभाया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी ऑनलाइन स्रोतों और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। आर्टिकल में दी गई जानकारी दे जरिये हम किसी भी प्रकार की कोई धार्मिक या फिर अन्य अंधविश्वास की पार्था को बढ़ावा नहीं देते है। किसी भी मान्यता पर भरोसा करना सभी का अपना अपना मत हो सकता है।



