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जंगली जानवरों से फसल तबाह होने पर अब सरकार देगी मुआवजा, किसानों को मिलेगा पूरा कवर

Farmer Update: किसान भाइयों हाथी के झुंड ने रातोंरात आपकी धान की फसल रौंद दी, नीलगाय आपके गन्ने को चट कर गए या बंदरों ने मकई के भुट्टे उखाड़ फेंके तो अब आपको बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये दर्द अब बीमा के दायरे में आएगा। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव किया है ओर अब आगे से आपके खरीफ 2026 से जंगली जानवरों से होने वाले फसल नुकसान का भी बीमा कवर मिलेगा। ये कोई पूरा पैकेज नहीं बल्कि एक ऐड-ऑन ऑप्शन होगा जिसे किसान अपनी मर्जी से चुन सकेगा।

आपको बता दें कि 2016 में शुरू हुई PMFBY में अब तक बाढ़, सूखा, ओले, कीट-पतंगे जैसे जोखिम ही कवर होते थे ओर जंगली जानवरों का नुकसान बाहर रहता था। अब कृषि मंत्रालय ने इसे “स्थानीय जोखिम” की कैटेगरी में डाल दिया है। इसका मतलब जिस इलाके में जिस जानवर की मार ज्यादा है वहां का किसान उसका कवर ले सकेगा।

राज्य सरकारें खुद तय करेंगी कि उनकी जमीन पर कौन-कौन से जानवर आधिकारिक तौर पर परेशानी पैदा करते हैं क्योंकि अलग अलग राज्यों में जंगली जानवर भी अलग अलग पाए जाते है। ज्यादातर राज्यों की लिस्ट में हाथी, नीलगाय, जंगली सुअर, हिरण और बंदर तो शामिल होते ही है लेकिन बाकी जानवर राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से जोड़ लेंगे।

किसान भाइयों अगर आपकी फसल में नुकसान हुआ तो अब लंबी भागदौड़ नहीं करनी है बल्कि आपको 72 घंटे के अंदर क्रॉप इंश्योरेंस ऐप पर रिपोर्ट करनी होगी। ऐप पर आपको क्या-क्या डालना है?

– भू-टैग वाली फोटो (यानी लोकेशन के साथ)
– कब और कहां नुकसान हुआ
– फसल कितनी तबाह हुई, थोड़ा-बहुत ब्यौरा

ये करने के बाद आगे फिर बीमा कंपनी और राज्य का अमला बर्बाद फसल की जांच करेगा। आपको बता दें कि पूरा खेल अब डिजिटल हो गया है इसलिए पहले के जैसे कागजों के साथ आपको महीनों तक चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के विदर्भ-गढ़चिरौली वाले इलाके, कर्नाटक-केरल का बॉर्डर, उत्तराखंड के तराई वाले जिले, हिमाचल के निचले हिस्से और पूरा नॉर्थईस्ट आदि जगहों पर किसान सालों से यही रो रहे थे कि हमारी फसल तो जानवर खा जाते हैं और बीमा में कुछ नहीं मिलता। लेकिन अब मिलेगा।

प्रीमियम की अगर बात करें किसान भाइयों तो खरीफ फसल पर किसान अभी भी सिर्फ 2 फीसदी प्रीमियम देगा, रबी पर 1.5 फीसदी ओर बागवानी फसलों पर 5 फीसदी। जंगली जानवर वाला ऐड-ऑन कवर लेना चाहो तो शायद थोड़ा एक्स्ट्रा प्रीमियम लगे क्योंकि उसकी दर अभी तय नहीं हुई है तो यहां उसका जिक्र नहीं कर रहे। बाकी सब कुछ पहले जैसा ही है ओर आपका बचा हुआ प्रीमियम केंद्र और राज्य मिलकर भरेंगे।

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