Kaanvad Yatra: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति में डूबा होता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कांवड़िए गंगा नदी से पवित्र जल लेकर अपने कंधों पर बांस की कांवड़ में लटकाकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा भक्ति, समर्पण और संयम का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन कई बार यात्रा के दौरान कांवड़ टूटने या भंग होने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में क्या होता है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या है? आइये इसको लेकर डिटेल में जानते है।
कांवड़ भंग होने का मतलब क्या है?
कांवड़ यात्रा में कांवड़ का भंग होना यानी गंगा जल से भरे बर्तन का टूटना, गिरना या जल का जमीन पर गिर जाना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कांवड़ को पवित्र माना जाता है और इसे जमीन पर रखना, इसका निचे दिर जाना या जल वाले बर्तन का टूटना अशुभ माना जाता है। अगर कांवड़ भंग हो जाए तो इसे यात्रा का अधूरा रहना माना जाता है। इससे भक्तों की मनोकामना पूरी होने में बाधा आ सकती है।
कांवड़ भंग होने पर क्या करें?
अगर यात्रा के दौरान कांवड़ टूट जाए या गंगा जल गिर जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। मान्यताओं के अनुसार ऐसी स्थिति में भक्त को दोबारा गंगा नदी पर जाना चाहिए। वहां स्नान करके शुद्ध मन से नई कांवड़ में गंगा जल भरना चाहिए। इसके बाद यात्रा को फिर से शुरू करना होता है। कुछ जगहों पर यह भी माना जाता है कि भक्त को शिव मंदिर में जाकर क्षमा याचना करनी चाहिए और छोटा-सा जलाभिषेक करना चाहिए। इससे भगवान शिव की कृपा फिर से प्राप्त हो सकती है।
कांवड़ यात्रा के नियम
कांवड़ यात्रा में कुछ सख्त नियमों का पालन करना जरूरी है। जैसे कांवड़ को कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इसे ऊंचे स्थान या स्टैंड पर रखा जाता है। यात्रा के दौरान सात्विक भोजन करना, नशे से दूर रहना और ब्रह्मचर्य का पालन करना भी जरूरी है। कांवड़ियों को हमेशा साफ कपड़े पहनने चाहिए और शिव का जाप करते रहना चाहिए। ये नियम यात्रा को सफल और पवित्र बनाते हैं।
कांवड़ यात्रा में भक्तों को सावधानी बरतनी चाहिए। गंगा जल को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत बर्तन और अच्छी गुणवत्ता की कांवड़ का इस्तेमाल करें। यात्रा के दौरान समूह में रहें और रास्ते में सावधानी रखें। अगर कोई गलती हो जाए तो मन में भक्ति और विश्वास रखें क्योंकि भगवान शिव अपने भक्तों की हर गलती को माफ करने वाले माने जाते हैं।
डिस्क्लेमर: अतुल भारत के इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। कांवड़ यात्रा से संबंधित यात्रा के बारे में अधिक जानकारी धार्मिक गुरुओं से प्राप्त जरूर करें। अतुल भारत किसी भी प्रकार भ्रांतियां नहीं फैलता है और सभी कांवड़ यात्रियों को अपने नियमों के अनुसार ही यात्रा करनी चाहिए।



